निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : अमेरिकी हमले की आशंका के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इस महीने की शुरुआत से ही दोनों देशों के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की पूरी तैयारी कर ली है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी मिलते ही हमला किया जा सकता है। इसके जवाब में ईरान ने भी जंग की व्यापक रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
पहला मोर्चा: प्रशासनिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण
ईरान सरकार ने सभी प्रांतीय गवर्नरों के अधिकार बढ़ा दिए हैं। नए नियमों के तहत युद्ध की स्थिति में गवर्नर अपने स्तर पर आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स और नागरिक सेवाओं से जुड़े फैसले ले सकेंगे। इसका मकसद युद्ध के दौरान अफरा-तफरी रोकना और अमेरिका को लंबे समय तक संघर्ष में उलझाए रखना है।
दूसरा मोर्चा: होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा
ईरान ने पानी के भीतर मिसाइलें और विस्फोटक तैनात किए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जंग शुरू होते ही होर्मुज स्ट्रेट को बाधित करने की योजना है। अगर यह मार्ग बंद होता है, तो मिडिल ईस्ट और एशिया में ऊर्जा संकट गहराने के साथ वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल मच सकती है।
तीसरा मोर्चा: अमेरिकी सैनिक निशाने पर
ईरान ने दावा किया है कि उसने मध्य पूर्व में तैनात करीब 40 हजार अमेरिकी सैनिकों को संभावित लक्ष्यों की सूची में रखा है। ईरानी रणनीतिकारों का मानना है कि शुरुआती हमलों से अमेरिकी सैन्य तंत्र को झटका दिया जा सकता है।
चौथा मोर्चा: प्रॉक्सी संगठनों की सक्रियता
ईरान समर्थित गुटों को भी अलर्ट पर रखा गया है। यमन के हूती विद्रोही लाल सागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना बना सकते हैं। वहीं, लेबनान में हिजबुल्लाह और इराक में कताइब जैसे संगठन भी ईरान के समर्थन में सामने आए हैं।
पांचवां मोर्चा: सत्ता की सुरक्षा
ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। सत्ता संरचना को बचाने के लिए उनके छोटे बेटे को कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
ईरान की सैन्य ताकत कितनी है?
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के अनुसार, ईरान सैन्य शक्ति में दुनिया में 16वें स्थान पर है।
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सक्रिय सैनिक: 6.1 लाख
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रिजर्व फोर्स: 3 लाख+
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रिवोल्यूशनरी गार्ड: लगभग 1.5 लाख
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लड़ाकू विमान: 188
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हेलिकॉप्टर: 129
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मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर: 1500+
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मजबूत पनडुब्बी बेड़ा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध छिड़ता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा मध्य पूर्व इसकी चपेट में आ सकता है।













